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कश्मीर में प्रर्दशनकारियों के खिलाफ एके-47 और स्पेशल गोलियां लेकर निकले जवान, महबूबा सन्न

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नई दिल्ली : कश्मीर में आतंकियों की ठुकाई लगातार जारी है. सेना दनादन आतंकी आकाओं को जहन्नुम पहुंचा रही है. वहीँ आतंकियों को बचाने वाले पत्थरबाजों को भी लगातार ठोका जा रहा है, जिसके कारण पत्थरबाजी की घटनाएं अब काफी कम हो गयी हैं. हालांकि अभी भी जुम्मे की नमाज के बाद भीड़ हिंसक हो जाती है. भड़काऊ भाषणों को सुनकर हिंसा पर उतारू हो जाने वालों के इलाज के लिए मोदी सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है, जिसे देख कश्मीरी कट्टरपंथियों की रूह काँप गयी है.


घाटी में प्रदर्शनकारियों पर चलेगी एके-47

एके-47 का नाम सुनते ही मन में डर बैठ जाता है. सेना द्वारा इसका इस्तेमाल आतंकियों को ठोकने के लिए किया जाता है लेकिन अब यही एके-47 घाटी की हिंसक भीड़ को नियंत्रित करने के काम आएगी. घाटी के दंगा प्रभावित क्षेत्रों में भीड़ को नियंत्रित करने, आगजनी वाले क्षेत्रों में और ऐसी जगहों पर जहां कानून व्यवस्था दुरुस्त करने की जरूरत है, ऐसी जगहों पर मोदी सरकार ने एके-47 का इस्तेमाल करके गोली मारने के आदेश दे दिए हैं.

इन इलाकों में सुरक्षाबल के जवान उपद्रवियों पर एके-47 से गोलियां चलाएंगे लेकिन ये गोलियां असली गोली नहीं होंगी. ये प्लास्टिक की गोलियां होंगी. इन प्लास्टिक की गोलियों से जान तो नहीं जायेगी लेकिन जिस किसी को ये लगेंगी, वो अगले कई महीनों तक इसके दर्द को नहीं भूलेगा.

जहाँ लगी, वहीँ नीला निशान बना देगी

इन गोलियों का मकसद भीड़ को तितर-बितर करना और पुलिस की तरफ बढ़ रही भीड़ को रोकना होगा. जैसे ही प्लास्टिक की गोली एके-47 बंदूक से निकलेगी वह टूट जायेगी और उसके छर्रे प्रदर्शनकारियों को लगेंगे जिससे उनकी जान तो नहीं जायेगी लेकिन मैदान छोड़कर भागने में उन्हें ज्यादा देर नहीं लगेगी.


सीआरपीएफ डीजी राजीव राय भटनागर ने यह जानकारी दी. उन्होंने बताया कि दंगा नियंत्रण का यह नया प्रयोग सुरक्षाबलों के मोटो से मेल खाता है कि उपद्रवियों पर काबू पाने के लिए फोर्स कम नुकसान वाले हथियारों का इस्तेमाल करेगी. उन्होंने बताया कि फिलहाल प्लास्टिक की 20000 गोलियां कश्मीर भेजी गई हैं.

तीन साल में विकसित हुई प्लास्टिक की गोली

सुरक्षाबलों ने तीन साल पहले इन गोलियों को विकसित करने का काम शुरू किया था. इस साल गोलियों का निर्माण पूरा हो गया है. जम्मू कश्मीर में पहली बार एके-47 में प्लास्टिक की गोलियों का इस्तेमाल होगा.

इस गोली को देश की प्रतिष्ठित संस्थान डीआरडीओ की मदद से विकसित किया गया है और अब घाटी में पैलेट गन के अलावा यह प्लास्टिक की गोलियां भी इस्तेमाल की जायेंगी. इसकी सफलता को देखते हुए देश के अन्य हिस्सों में भी इसी तरीके से दंगा नियंत्रण का कार्य किया जाएगा.


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