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24 घंटे के अंदर ही हिन्दुओं के खिलाफ एक और तानाशाही फरमान, देश में आज तक नहीं हुआ था ऐसा

नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट के दिल्ली एनसीआर में पटाखों की बिक्री पर प्रतिबन्ध लगाने के बाद कई वामपंथियों और बुद्धिजीवियों की आवाज़ ऊँची हो गयी है. कुछ लोगों समझ नहीं पा रहे हैं कि ये किस तरह का फैसला सुना दिया है कि सिर्फ दिवाली के लिए पटाखे बैन, क्रिसमस और नए साल के जश्न पर धुआंधार आतिशबाज़ी होती है उससे प्रदुषण नहीं फैलता. तो अब सुप्रीम कोर्ट के पीछे-पीछे 24 घंटे के अंदर बॉम्बे हाई कोर्ट ने भी हिन्दुओं के खिलाफ फैसला सुना दिया है.


दिल्ली के बाद अब इस राज्य में भी पटाखे पर लगाया गया बैन

एक शुरुआत जो दिल्ली से हुई थी अब वो धीरे-धीरे पूरे भारत में फैलती जा रही है. वो शुरुआत जो हिन्दू समाज के सबसे बड़े माने जाने वाले त्यौहार दिवाली से जुड़ा है. ऐसा लग रहा है एक साथ कई जज के अंदर का वामपंथी एक साथ जाग उठा है. अभी तक ये समस्या सिर्फ बंगाल तक थी. वहां हिन्दुओं के त्यौहार पर एक के बाद एक कई पाबंदिया लगायी गयी. कभी मूर्ति विसर्जन पर रोक, तो कभी रामनवमी पर रोक, कभी अस्त्र पूजा पर रोक.

अभी मिल रही खबर के अनुसार अब बॉम्बे हाईकोर्ट ने केवल रिहाईशी इलाकों में पटाखे बेचने पर रोक लगाई है. अब इस फैसले का मतलब है कि पटाखे बाकी पूरे महारष्ट्र में बेचे जा सकते हैं सिर्फ रिहायशी इलाकों में नहीं. ऊपर से कोर्ट ने सफाई भी दी है कि पटाखे बेचने पर रोक लगाई है जलाने पर नहीं. अरे जब बिकेंगे नहीं तो लोग क्या पिछले साल के पटाखे फोड़ेंगे. चीन का माल इस साल का नहीं चलता पिछले साल का कहाँ से चलेगा.


तो अब हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश मंजुला चेल्लूर के इस फैसले के बाद महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के प्रमुख राज ठाकरे ने का खून खौल उठा है. उन्होंने पटाखों पर बैन के हाईकोर्ट के फैसले का कड़ा विरोध जताया है.

अदालत : एक नवंबर के बाद पटाखे पर खुली छूट !

न्यायाधीश न्यायमूर्ति एके सिकरी की अध्यक्षता वाली पीठ ने फैसले को बरकरार रखते हुए कहा है “हमें कम से कम एक दिवाली पर पटाखे मुक्त त्योहार मनाकर देखना चाहिए.’ अदालत ने कहा कि दिल्ली-एनसीआर में पटाखों की बिक्री और भंडारण पर प्रतिबंध हटाने का 12 सितंबर 2017 का आदेश एक नवंबर से दोबारा लागू होगा यानी एक नवंबर से दोबारा पटाखे बिक सकेंगे.”. अब एक नवंबर के बाद तो क्रिसमस और नए साल पर धड़ल्ले से पटाखे चलाये जाएंगे सिर्फ दिवाली से ही सबको तकलीफ हो रही है.

आपको बता दें पिछले साल भी कुछ वामपंथियों ने बच्चों से सुप्रीम कोर्ट में पटाखा बैन को लेकर अर्जी डलवाई थी. सुप्रीम कोर्ट में तीन बच्चों की ओर से दाखिल एक याचिका में दशहरे और दीवाली पर पटाखे जलाने पर पाबंदी लगाने की मांग की गई थी. इस अनूठी याचिका को दाखिल करने वाले इन बच्चों की उम्र महज छह से 14 महीने के बीच थी. कुछ बच्चों को आगे कर के तमाम सेकुलर ग्रुप ने हिन्दुओं के खिलाफ बड़ी गहरी साज़िश रची है.


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