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कट्टरपंथियों के खिलाफ भारतीय सेना को मिली सुपर पावर, जान बचा कर भागे रोहिंग्या उग्रवादी !

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नई दिल्ली : पिछले कुछ वक़्त से म्यांमार में जारी हिंसा और कश्मीर में हो रहे आतंकी हमलों के मद्देनज़र सरकार काफी सतर्क है. इसी कड़ी में असम में आर्म्ड फोर्सेस स्पेशल पावर एक्ट (अफ्स्पा) की अवधि अगले छह महीनों के लिए बढ़ाने का फैसला लिया गया है. असम में आफस्पा को लागू हुए 27 साल हो चुके हैं. 27 साल में ऐसा पहली बार है, जब केन्द्र की बजाय खुद राज्य सरकार ने यहाँ अफ्स्पा की अवधि को बढ़ाने का फैसला लिया है. हालांकि कई मानवाधिकार संगठन अफ्स्पा का विरोध करते रहे हैं.

असम पुलिस के एडिशनल डीजी (स्पेशल ब्रांच) पल्लब भट्टाचार्य ने जानकारी दी कि असम के इतिहास में पहली बार है, जब राज्य सरकार ने खुद अफ्स्पा की अवधि 6 महीने के लिए बढ़ाई है. दरसल म्यांमार में हाल-फिलहाल में स्थिति काफी भयानक चल रही है. रोहिंग्या कट्टरपंथियों ने आतंक मचाया हुआ है और उसके जवाब में म्यांमार सेना ने रौंद्र रूप धारण किया हुआ है. म्यांमार सेना की हाहाकारी कार्रवाई के बाद हजारों की संख्या में रोहिंग्या मुस्लिम बांग्लादेश और भारत में घुसने की फिराक में हैं. साथ ही उल्फा उग्रवादी भी म्यांमार के जंगलों में ही अपने ठिकाने बनाते हैं. ऐसे में किसी भी तरह की अनहोनी ना हो सके, इसके लिए राज्य सरकार काफी सतर्क है.

उग्रवादियों और आतंकियों पर नकेल !

बता दें कि केन्द्र सरकार ने 27 नवंबर 1990 में असम में आफस्पा को उस वक़्त लागू किया था, जब असम में उग्रवाद चरम पर था और उल्फा की उग्रवादि गतिविधियां बढ़ती ही जा रही थीं.


केन्द्र सरकार ने पिछली बार अफ्स्पा की अवधि 3 अगस्त से 31 अगस्त तक के लिए बढ़ाई थी. असम सरकार ने ही केन्द्र को राज्य के कुछ इलाकों में अफ्स्पा को जारी रखने की समीक्षा का सुझाव दिया था. हालांकि इसके बाद गृह मंत्रालय ने असम और अरुणाचल प्रदेश से अफ्स्पा को हटाने के लिए सिफारिश भी मांगी थी. अफ्स्पा उग्रवाद और आतंकवाद से लड़ाई के दौरान सैन्यबलों को विशेष अधिकार इस्तेमाल करने की छूट देता है.

केंद्र की अफ्स्पा हटाने की सिफारिश के बाद असम सरकार ने इसे हटाने के किसी भी इरादे को फिलहाल होल्ड पर रख लिया था क्योंकि म्यांमार स्थित उल्फा ऐसे उग्रवादी हैं जो बड़े पैमाने पर आतंक फैलाने में सक्षम हैं.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि असम और जम्मू कश्मीर की सीमा से लगने वाले मेघालय के 20 किलोमीटर बेल्ट में भी अफ्स्पा लागू है. पंजाब में भी आतंकवाद के वक्त अफ्स्पा लागू किया गया था, हालांकि स्थिति शांत होने पर 1997 में इसे वापस ले लिया गया था. 1997 में त्रिपुरा में अफ्स्पा लागू किया गया था, जिसे हालात सामान्य होने पर 2015 में वापस ले लिया गया था.


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