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मोदी ने किया जबरदस्त कमाल, भारत को मुफ्त में तेल देगा अबू धाबी, पूरी दुनिया में मची खलबली

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नई दिल्ली ( 12 फरवरी ) : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने अबू धाबी की यात्रा के दौरान पेट्रोल-डीजल की समस्या से जूझ रहे भारत की बड़ी परेशानी का हल निकालते हुए बड़ा फैसला लिया था. जिसके तहत ओएनजीसी विदेश लिमिटेड ने 60 करोड़ डॉलर में अबू धाबी ऑयल फील्ड में 10 प्रतिशत हिस्सा खरीदा है. अब इसी सिलसिले में एक और जबरस्त खबर सामने आ रही है, जिसे देख आप भी पीएम मोदी की कूटनीति के सामने नतमस्तक हो जाएंगे.


भारत को मुफ्त में तेल देगी अबू धाबी की कंपनी

किसी भी बड़े युद्ध के दौरान देश के पास पर्याप्त पेट्रोल-डीजल होना चाहिए. बिना तेल के कोई युद्ध जीता नहीं जा सकता. 60 सालों तक कांग्रेस देश को लूटने में व्यस्त रही, मगर देश की सुरक्षा के लिए कुछ ख़ास नहीं किया. मगर पीएम मोदी ने अबू धाबी की अपनी यात्रा के दौरान एक ऐसा बड़ा काम कर दिखाया है, जिसे देख आप भी वाह-वाह कर उठेंगे.

प्रधानमंत्री की कूटनीति के कारण अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी (ADNOC) अपना कच्चा तेल भारत में स्टोर करने को राजी हो गई है. इसके जरिये भारत के लिए क्षेत्रीय ऑयल स्टोरेज और व्यापरिक केंद्र बनने का रास्ता साफ हो गया है. यानी मंगलुरु में भारत अबू धाबी का तेल स्टोर करेगा और बदले में अबू धाबी की कंपनी तेल का दो तिहाई हिस्सा भारत को देगी वो भी बिलकुल मुफ्त में.

तेल का दो तिहाई हिस्सा भारत को मिलेगा

ये एक बेहद ऐतिहासिक कदम है, इसकी गंभीरता का अंदाज आप इस बात से लगा सकते हैं कि भारत के किसी ऑयल प्रॉजेक्ट में यूएई की तरफ से किया जाना वाला यह पहला निवेश होगा. इसके जरिये ना केवल भारत की तेल की समस्या दूर होगी बल्कि आर्थिक लाभ भी मिलेगा. साथ ही किसी प्राकृतिक आपदा अथवा किसी आपात स्थिति के लिए भारत के पास पर्याप्त मात्रा में तेल रिजर्व होगा.

तेल का उत्पादन करने वाले पश्चिमी एशियाई देशों के साथ भारत के व्यापारिक संबंधों में इसे एक नया मोड़ माना जा रहा है. अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी (ADNOC) अप्रैल की शुरुआत में तीन बड़े जहाज़ों में भरकर कच्चा तेल भारत भेजेगी, जिससे मंगलुरु के 15 लाख टन की क्षमता वाले आयल रिजर्व को आधा भरा जाएगा.

आपात स्थिति से निपटने की ताकत में होगा इजाफा

मतलब यदि कोई प्राकृतिक आपदा आती है अथवा किसी देश के साथ युद्ध की स्थिति आ जाती है तो भारत के पास दुश्मन को धूल चटाने के लिए पर्याप्त मात्रा में तेल होगा, जिसका उपयोग लड़ाकू विमानों या अन्य सैन्य वहां को चलाने किया जा सकेगा.

सरकारी कंपनी भारतीय स्ट्रैटिजिक पेट्रोलियम स्टोरेज लिमिडेट (ISPRL) ने अबू धाबी की ADNOC के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत मेंगलुरु में कच्चे तेल को स्टोर किया जाएगा.


आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इससे संबंधित डील जनवरी 2017 में तब हुई थी, जब अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख मोहम्मद बिन जायद गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होने आए थे. अब पीएम मोदी के दौरे में इस डील को फाइनल कर दिया गया है.

अबू धाबी की कंपनी 5,860,000 बैरल कच्चा तेल मेंगलुरु में स्टोर करेगी. इस तेल का कुछ हिस्सा कंपनी अपने ग्राहकों को सप्लाई करने के लिए इस्तेमाल करेगी, जबकि बाकी तेल को किसी प्राकृतिक आपदा जैसी आपात स्थिति के लिए बचाकर रखा जाएगा. यानी लगभग दो तिहाई हिस्सा भारत को मिलेगा, जिसका उपयोग भारत आपात स्थिति में करेगा.

दक्षिण कोरिया की जगह भारत के साथ मिलाया हाथ

अप्रैल से तेल आना शुरू होगा और मई महीने तक आयल रिजर्व भर जाएगा. अबू धाबी की कंपनी ADNOC की दक्षिण कोरिया के साथ लीज़ पिछले साल ही ख़त्म हुई थी, जिसे दोबारा से शुरू करने की जगह अबू धाबी ने भारत के साथ हाथ मिलाना ज्यादा जरूरी समझा. बताया जा रहा है कि फिलहाल भारत के पास 66 दिनों के लिए तेल है. आपात स्थित के लिए जमा तेल 10 अन्य दिनों के लिए पर्याप्त है.

पीएम मोदी की कूटनीति बेशक रंग ला रही है, अरब देशों के साथ सम्बन्ध आज इतने मजबूत हो चुके हैं, जितने पिछले 60 वर्षों में भी नहीं थे. ना केवल इजराइल के साथ भारत के मजबूत रिश्ते स्थापित हो चुके हैं बल्कि अरब देश भी पीएम मोदी को वर्ल्ड लीडर के तौर पर देखते हैं.

यही कारण है कि अबू धाबी ने ना केवल पहले हिन्दू मंदिर के लिए जमीन दान की है, बल्कि आतंकवाद के खिलाफ भी भारत के साथ समझौते करने के लिए तैयार हो गया है. जिनकी मदद से भारत के मोस्ट वांटेड दाऊद इब्राहिम की अबू धाबी की सारी संपत्ति जल्द ही जब्त होने जा रही है.

साथ ही अब अबू धाबी अपना तेल भी भारत के स्टोरेज में सुरक्षित रखेगा और दो तिहाई तेल भारत को भी देगा. जानकारों के मुताबिक़ ये तो केवल शुरुआत भर है, अबू धाबी की देखादेखी अब अन्य अरब मुल्क भी इसी तरह के फैसले लेंगे.

अब अबू धाबी की देखा-देखी अन्य अरब देश भी भारत के साथ इसी तरह के करार करने को उत्सुक हैं. ईरान के साथ चाबहार पोर्ट का करार तो पहले ही हो चुका है. अब सऊदी अरब व् अन्य खाड़ी देश भी भारत के साथ व्यापारिक संबंधों को प्रगाढ़ करने के लिए उत्सुक हैं.


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