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गोरखपुर गए राहुल गाँधी को लेकर सामने आयी ऐसी शर्मनाक खबर, जिसे देख दंग रह जाएंगे आप !

rahul-karnataka

बेंगलुरु : कर्नाटक में कर्ज में डूबे किसानों का आत्महत्या करना लगातार जारी है. बताया जा रहा है कि अब तक 90 से ज्यादा किसान आत्म ह्त्या कर चुके हैं. वहीँ राज्य की कांग्रेस सरकार मूक दर्शक बनी किसानों की मौत का तमाशा देख रही है. मध्य प्रदेश में किसानों के आंदोलन पर हाय-तौबा मचाने वालों को कर्नाटक में मरते किसान मानो दिखाई ही नहीं दे रहे हैं.

औपचारिक आंकड़ों के मुताबिक, केवल जुलाई के महीने में ही 90 से ज्यादा किसानों ने आत्महत्या कर ली. हालांकि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने किसानों का 8165 करोड़ रुपये का कर्ज छोड़ देने की बात कही थी, लेकिन फिर भी किसानों का मरना बदस्तूर जारी है. राज्य के 22 लाख किसान कर्ज के बोझ के तले दबे हैं. इन किसानों ने कोऑपरेटिव बैंकों से 50 हजार रुपये का कर्जा लिया था. कर्जमाफी के अगले ही महीने में इतने सारे किसानों की आत्महत्या से स्पष्ट है कि कर्जमाफी भी इसे रोकने के लिए काफी नहीं है.

राहुल गोरखपुर में व्यस्त !

बताया जा रहा है कि 1 अप्रैल से 30 जून (2017-18) के बीच प्रतिदिन 2 किसानों ने अपनी जान दे दी, लेकिन जुलाई में हालात और भी ज्यादा खराब हो गए. जुलाई में प्रतिदिन 3 की दर से किसानों ने आत्महत्या की है. सबसे दुखद और शर्मनाक बात ये है कि जिस कांग्रेस के शासन में प्रतिदिन 2-3 किसान आत्महत्या कर रहे हैं, उसी कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी गोरखपुर में बच्चों की मौत पर राजनीति करने में व्यस्त हैं.

देखिये सबूत


15 अगस्त को कर्नाटक में 50 वर्षीय रमेश नाम के किसान ने जहर खा कर आत्महत्या कर ली. रमेश के पास मद्दुर तालुका के अंबाराहल्ली में एक एकड़ जमीन थी. शुरुआती जांच में सामने आया है कि रमेश पर 2 लाख का कर्ज था, जिसे वो चुका नहीं पा रहा था. इसी के चलते उसने अपनी जान दे दी. सवाल ये है कि क्या राहुल गांधी को इस वक़्त गोरखपुर में होना चाहिए या फिर कर्नाटक में जा कर किसानों की सहायता करनी चाहिए.

देखिये क्या कर रहे हैं राहुल गाँधी

गोरखपुर में हुए हादसे के बाद जैसे तुरंत सीएम योगी गोरखपुर गए और पूरे मामले पर संज्ञान लिया, क्या उसी तरह से राहुल गाँधी को कर्नाटक नहीं जाना चाहिए? क्यों किसान केवल चुनाव के वक़्त ही याद आते हैं? गोरखपुर हादसे में और मध्य प्रदेश में किसान आंदोलन के वक़्त हाय-तौबा मचाने वाले मीडिया ने भी कर्नाटक में किसानों की आत्महत्या मामले पर मौन धारण कर लिया है. आखिर ये एकतरफा रिपोर्टिंग देश को कहाँ ले जा रही है और ऐसी मीडिया पर आखिर देश कैसे भरोसा करेगा.


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