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नोटबंदी के बाद 2000 के नोटों को लेकर मोदी सरकार का हाहाकारी फैसला, कालेधन कुबेरों के छूटे पसीने

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नई दिल्ली : कालेधन को नष्ट करने और काले कुबेरों की कमर तोड़ने के लिए पीएम मोदी ने नोटबंदी का फैसला लिया था. रातों-रात देश में चल रहे 500 और 1000 रुपये के नोटों को बंद करके देश को चौंका दिया था. अरबों रुपयों का कालाधन पकड़ा गया, करोड़ों रुपये का कालाधन बईमानों को नदी-नालों में बहाने पर मजबूर होना पड़ा था. 500 के नए नोट चलाये गए और साथ ही 1000 की जगह 2000 रुपये के नोट चलाये गए, लेकिन भारत के कुछ लोगों के मानो खून में ही बेईमानी दौड़ रही है और जब तक अर्थव्यवस्था पूरी तरह से कैशलेस नहीं हो जाती, वो सुधरने वाले नहीं हैं.

बंद हो सकते हैं 2000 रुपये के नोट

खबर आयी है कि एक बार नोटबंदी का झटका खाने के बाद भी काले धन के खिलाड़ी बाज नहीं आ रहे हैं. बाजार से धीरे-धीरे 2000 रुपये के नोट गायब होते जा रहे हैं, जिससे आशंका जताई जा रही है कि कालेधन के खिलाड़ियों ने एक बार फिर नोटों को अपनी तिजोरियों में इकट्ठा करना शुरू कर दिया है. इस आशंका के बाद आरबीाई ने संकेत दिये हैं कि यदि 50 फीसदी से ज्यादा दो हजार के नोट अर्थव्यवस्था से गायब हुए तो फिर से कड़वी दवाई दी जा सकती है, यानी 2000 के नोटों को बंद किया जा सकता है. सूत्रों के मुताबिक़ मोदी सरकार भी इस स्थिति में ऐसा कदम उठा सकती है.

हालांकि वित्त मंत्रालय का कहना है कि ऐसा कोई भी कदम उठाने से पहले हर स्तर से यह पुख्ता कर लिया जाएगा कि अर्थव्यवस्था से गायब हुए बड़े नोटों का वापस आना खत्म हो चुका है. नोटबंदी के बाद रिजर्व बैंक की ओर से अब तक जारी किये गए नोटों और बंद हो चुके नोटों की वापसी से जुडी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है. जाहिर सी बात है कि एक बार फिर से नोटबंदी जैसा कोई फैसला बिना किसी ठोस आकलन के नहीं लिया जा सकता है.

लेकिन कानपुर के रिजर्व बैंक के क्षेत्रीय कार्यालय से जो आंकड़े मिले हैं, उनसे थोड़ी हलचल मच गयी है. कानपुर में नवंबर 2016 में 2000 रुपये के नोट जारी किये गए थे. उसके बाद से अब तक आरबीआइ कानपुर की सभी करेंसी चेस्ट को लगभग 6 हज़ार करोड़ रुपये के 2000 के नोट जारी कर चुका है. आंकड़ों के मुताबिक़ मार्च के महीने तक यहाँ के बैंकों में 2000 रुपये के नोट जमा होने की गति ठीक रही लेकिन उसके बाद बाजार से 2000 रुपये के नोट गायब होने लगे.

फिलहाल बैंकों में 10, 20, 50 और 100 रुपये के नोट ज्यादा जमा हो रहे हैं. ऐसे में यदि देशभर से यही शिकायत मिलती है और 50 फीसदी से ज्यादा 2000 के नोट बाजार से गायब होते हैं तो इस बार 2000 के नोटों को बंद किया जा सकता है. वैसे ये बात तो तय है कि भ्रष्टाचार की मलाई खाने वाले काले कुबेर इतनी आसानी से तो सुधरने वाले हैं नहीं, इन्हे सुधारने के लिए कैशलेस सिस्टम ही सबसे उपयुक्त रहेगा.

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