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अभी-अभी : सीएम योगी ने लिया ऐसा घनघोर फैसला, देशभर में मचा ग़दर, अखिलेश खेमे में भी हड़कंप !

yogi-akhilesh

नई दिल्ली : यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनाने के अपने सपने को पूरा करने के लिए तेजी से लगे हुए हैं. वो प्रदेश में एक नए पैसे का भी भर्ष्टाचार होते हुए नहीं देखना चाहते और साथ ही पिछली सरकार के दौरान हुए घोटालों की जांच करवा कर दोषियों को दंड दिलवाने के अपने फैसले के प्रति भी बेहद गंभीर हैं. इसी कड़ी में अभी-अभी उन्होंने एक और जबरदस्त फैसला लिया है, जिसे देख यूपी में हड़कंप मच गया है.

यमुना एक्सप्रेसवे पर 6 बिल्डर्स के 17 प्रोजेक्ट्स रद्द !

योगी सरकार ने ग्रेटर नोएडा को लेकर बड़ा फैसला लेते हुए यमुना एक्सप्रेसवे के किनारे बन रहे सारे प्रोजेक्ट्स को रद्द कर दिया है. खबर है कि आज शाम को हुई बैठक में ये फैसला लिया गया है कि ग्रेटर नोएडा में यमुना एक्सप्रेस वे के किनारे बन रहे 6 बिल्डर्स के 17 प्रोजेक्ट्स रद्द किए जाएंगे.

गौरतलब है कि यमुना एक्सप्रेस वे के किनारे-किनारे गौर सन्स, अजनारा, जेपी ग्रुप और ओरिस इंफ्रा और कई अन्य बिल्डरों के प्रोजेक्ट बन रहे थे. एकाएक इन प्रोजेक्ट्स के रद्द हो जाने से बड़ी संख्या में निवेशक घबराहट और आशंका से घिर गए हैं.

अवैध तरीके से करा रहे थे निर्माण !

वहीँ इस पूरे मामले में यमुना एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रि‍यल डेवलपमेंट अथॉरिटी का कहना है कि बिल्डर बिना नक्शा मंजूर कराए अवैध तरीके से इन प्रोजेक्ट का निर्माण करा रहे थे, जिसके चलते कानूनी तौर से इन प्रोजेक्ट्स को रद्द किया गया है. आपकी जानकारी के लिए इन प्रोजेक्ट्स को अखिलेश और मायावती की सरकार के दौरान मंजूरी मिली थी, और अथॉरिटी के मुताबिक़ पिछली सरकारों के दौरान बिना नक़्शे पास कराये ही बिल्डरों ने प्रोजेक्ट्स का काम शुरू भी कर दिया.


इन बिल्डरों को अब नए सिरे से बिल्डिंग प्लान का नक्शा मंजूर करने के लिए आवेदन करना होगा. वहीँ कई बिल्डरों ने तो निर्माण कार्य शुरू किये बिना ही फ्लैट बुक करवाकर निवेशकों से पैसे लिए हुए हैं. गौरतलब है कि यमुना एक्सप्रेस-वे का निर्माण जेपी इंफ्राटेक ने किया है और इसके निर्माण के लिए प्रदेश सरकार से हुए समझौते के तहत जेपी इंफ्राटेक को एक्सप्रेस-वे के किनारे पांच सौ हेक्टेयर जमीन दीं गयी थी.

राजनीतिक पहुंच का दुरुपयोग !

बिल्डरों की ओर से नक्शा मंजूर कराने का आवेदन किया तो गया था, लेकिन जब प्राधिकरण ने इस पर आपत्ति लगाई तो बिल्डरों ने प्राधिकरण की आपत्ति का कोई जवाब देना जरुरी नहीं समझा और बिना मंजूरी मिले ही निर्माण शुरू कर दिया. बिल्डरों का बिल्डिंग प्लान नियोजन विभाग में लटका रहा, जबकि नियम के मुताबिक़ आवेदन करने के 6 महीने में यदि बिल्डिंग प्लान का नक्शा मंजूर नहीं होता तो खुद ब खुद रद्द हो जाता है.

ख़बरों के मुताबिक़ पिछली सरकार के नेताओं से सांठ-गाँठ के चलते बिल्डरों ने बिल्डिंग प्लान का नक्शा मंजूर न होने की परवाह नहीं की और निर्माण कार्य शुरू कर दिया. लेकिन योगी सरकार ने नियमों के अनुरूप चलते हुए तत्काल प्रभाव से सारे प्रोजेक्ट्स को रद्द कर दिया है.


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