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लघुकथा – तनाव व् चिंता से मुक्त होकर सफल जीवन जीने का राज़

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व्यस्त और भागदौड़ से भरी ज़िंदगी में अक्सर ही लोगों को तरह-तरह की चिंताएं व् तनाव आदि घेर लेते हैं. ऐसा देखा गया है कि तनावग्रस्त व्यक्ति जिंदगी में सफल नहीं हो पाते, वहीँ सफल लोगों पर गौर करेंगे तो पता चलता है कि वो कभी भी अधिक समय तक तनावग्रस्त नहीं रहते. देखिये कैसे एक अध्यापक ने तनाव व् चिंता से मुक्त होकर सफल जीवन जीने का राज़ एक लघुकथा के जरिये से समझा दिया.


पानी का एक ग्लास

एक अध्यापक बच्चों को मनोविज्ञान की शिक्षा देने कक्षा में आये. अध्यापक ने बच्चों से किताबें अलग रख कर उनकी तरफ ध्यान देने को कहा. फिर उन्होंने फ़ौरन अपनी मेज पर रखा पानी का एक ग्लास अपने हाथ में उठाया और सामने बैठे छात्रों से पूछा, ”आपके हिसाब से पानी के इस ग्लास का कितना वज़न होगा?”

छात्रों ने अंदाजा लगाते हुए उत्तर देना शुरू किया, किसी ने कहा 100 ग्राम, किसी ने कहा 200 ग्राम तो किसी ने 250 ग्राम बताया.

अध्यापक ने आगे पूछा, यानी यदि मैं इस हलके से ग्लास को 5 मिनट तक अपने हाथ में इसी तरह उठाये राहु तो मुझे कुछ नहीं होगा, मगर प्रश्न ये है कि यदि मैं इसे एक घंटे तक इसी तरह से उठाये रहूँ तब क्या होगा?

“आपके हाथ में दर्द होने लगेगा”, छात्रों ने जवाब दिया.

अध्यापक बोले “तुम बिलकुल सही हो, लेकिन यदि मैं इस ग्लास को इसी तरह पूरे दिन उठाये रहूँ तो क्या होगा?”

”आपका हाथ सुन्न पड़ सकता है, आपके हाथ की मांसपेशियों में खिंचाव भी आ सकता है, हाथ को लकवा भी मार सकता है और आपको अस्पताल तक जाना पड़ सकता है” छात्रों ने फ़ौरन जवाब दिया और हंस पड़े.


“बिलकुल ठीक कहा, ऐसा ही होगा. लेकिन अगला सवाल ये है कि क्या इस दौरान ग्लास का वज़न बदला?” अध्यापक ने पूछा.

उत्तर आया ”नहीं”.

”तो फिर मेरे हाथ में दर्द और मांशपेशियों में खिंचाव क्यों आएगा?” अध्यापक ने आगे पूछा.

अब सभी छात्र हैरत में पड़ गए और बोले क्योंकि आप ग्लास को अधिक देर तक उठाये रखेंगे.

“एक बार फिर बिलकुल सही जवाब दिया बच्चों, अच्छा अब ये बताओ कि इस दर्द और तकलीफ से निजात पाने के लिए मुझे क्या करना चाहिए?” अध्यापक ने फिर पूछा

“ग्लास को नीचे रख दीजिये” सभी छात्र एक साथ बोल पड़े.

”बिलकुल सही” अध्यापक ने कहा. मेरे प्यारे बच्चो जिंदगी में भी ठीक ऐसा ही होता है, समस्याओं व् चिंता को कुछ वक़्त तक अपने दिमाग में रखिये तो लगेगा कि सब ठीक है. इनके बारे में ज्यादा देर तक सोचोगे तो आपको तकलीफ होने लगेगी, मानसिक तनाव बढ़ने लगेगा और यदि इन्हें और भी अधिक वक़्त तक अपने दिमाग में रखोगे तो ये आपको बुरी तरह जकड लेंगी और आप मानसिक व् शारीरिक रूप से अक्षम भी हो सकते हैं. अपने जीवन में आने वाली चुनातियों व् समस्याओं के बारे में सोचना तो बेहद ज़रूरी है, लेकिन दिन के अंत में सोने जाने से पहले उन्हें नीचे रखना उससे भी ज्यादा ज़रूरी है.


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