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सख्ती बरतने में मोदी को भी पीछे छोड़ते हुए योगी ने सुनाया ऐसा हाहाकारी फैसला, थर-थर काँपे अखिलेश

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लखनऊ : देश में मोदी और उत्तर प्रदेश में योगी मिलकर ऐसे-ऐसे कड़े फैसले ले रहे हैं कि मानो दोनों में रेस लगी हो कि कौन ज्यादा कड़े फैसले ले सकता है. पीएम मोदी ने आज आपरेशन ब्लैकमनी की शुरुआत की जिसके तहत ईडी देशभर में ताबड़तोड़ छापेमारी कर रही है तो योगी भला कहाँ पीछे रहने वाले थे. उन्होंने यूपी में सीधे अखिलेश की ओर निशाना लगा कर एक ऐसा तीर चला दिया जिससे समाजवादी पार्टी में खलबली मच गयी है.

अखिलेश सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट्स की जांच !

दरअसल योगी सरकार ने प्रदेश की राजधानी लखनऊ में अखिलेश सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट्स की जांच कराने का फैसला ले लिया है. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि 1373.64 करोड़ रुपये की इन परियोजनाओं पर अखिलेश सरकार ने एक हज़ार करोड़ रुपये से अधिक खर्च कर दिए लेकिन फिर भी इनके कई कार्य अभी तक अधूरे ही हैं.

जिसके कारण इन परियोजनाओं में से बड़े घोटाले की बू आने लगी थी. इसी के चलते योगी सरकार ने लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) के उपाध्यक्ष को इसकी जांच के निर्देश दे दिए हैं. कोई अन्य सरकार होती तो जांच भी सालों तक चलती और भ्रष्ट अधिकारी मजे करते रहते लेकिन ये तो योगी सरकार है इसलिए उपाध्यक्ष को केवल तीन दिन में इसकी जांच करके पूरी रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं.

क्या है पूरा मामला ?

दरअसल उस वक़्त मुख्यमंत्री रहे अखिलेश यादव की पहल पर ही राजधानी लखनऊ में इन परियोजनाओं को मंजूरी दी गई थी. इसके तहत गोमतीनगर में 18.64 एकड़ भूमि पर 864.99 करोड़ रुपये के विश्वस्तरीय सुविधायुक्त जय प्रकाश नारायण अंतर्राष्ट्रीय केंद्र को, 355.60 करोड़ रुपये की 376 एकड़ में फैले जनेश्वर मिश्र पार्क, 846.49 एकड़ में 872.58 करोड़ रुपये की सीजी सिटी और 153.05 करोड़ रुपये की पुराने लखनऊ में सौन्दर्यीकरण परियोजना को मंजूरी दी गई थी.

हैरानी की बात तो ये है कि एलडीए की देखरेख में चल रही इन परियोजनाओं के लिए अखिलेश सरकार द्वारा बाकायदा 1100.10 करोड़ रुपये दिए जा चुके हैं लेकिन फिर भी इनके कई काम अभी तक अधूरे ही हैं. जनता को दिखाने भर के लिए जल्दी-जल्दी में अखिलेश यादव ने आधे-अधूरे कार्यो का ही लोकार्पण कर दिया था.

इसके बाद से ही शिकायतें आना शुरू हो गयी थीं. परियोजना के ज्यादातर काम तो वक़्त पर पूरे ही नहीं किये गए और जो थोड़े बहुत काम पूरे हुए भी उनकी गुणवत्ता को लेकर भी प्रश्न खड़े होते रहे हैं. परियोजनाओं के बड़े स्तर पर अनियमितताओं की शिकायतें मिलने पर योगी सरकार ने इनकी जांच करने के आदेश दे दिए हैं.

जेल जा सकते हैं कई बड़े अधिकारी व् नेता !

ऊपर से ऑर्डर्स मिलने पर शुक्रवार को आवास एवं शहरी नियोजन विभाग के विशेष सचिव शिव जनम चौधरी की ओर से एलडीए उपाध्यक्ष सत्येन्द्र सिंह को पत्र भेजा गया है. एलडीए उपाध्यक्ष को स्थलीय निरीक्षण करके सभी परियोजनाओं की वित्तीय व भौतिक प्रगति की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं. साथ ही ये भी निर्देश दिए गए हैं कि तीन दिन में परियोजनओं में हुई अनियमितताओं के लिए दोषी सभी एजेसियों व् अधिकारियों के ब्योरे के साथ एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करके शासन को सौंपी जाए.

विभागीय प्रमुख सचिव सदाकांत के मुताबिक़ एलडीए उपाध्यक्ष की जांच रिपोर्ट मिलने के बाद शासन स्तर पर उसका परिक्षण किया जाएगा और अनियमितताओं के लिए दोषी एजेसियों और अधिकारियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्यवाही की जायेगी. इसी के साथ इन परियोजनाओं के लिए दी जाने वाली शेष 273.53 करोड़ रुपये की रकम को जारी करने पर भी रोक लगा दी गई है.

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