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योगी के एक फैसले से यूपी-बिहार में हुई ऐसी अनोखी जुगलबंदी, देखकर सन्न रह गए नितीश कुमार !

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लखनऊ : यूपी में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सरकार बनाते ही ताबड़तोड़ फैसले लेने शुरू कर दिए. उनके काम करने की तेजी देख देशभर के बड़े-बड़े नेता तक हैरान हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ अब एक ऐसी खबर सामने आ रही है जिसे देख बिहार के सीएम नितीश कुमार तक हैरत में पड़ गए हैं.


तुम मुझे शराब दो, हम तुम्हें कबाब देंगे ?

दरअसल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अवैध मीट कारोबारियों के ख़िलाफ हल्ला बोला हुआ है. प्रदेश में चल रहे अवैध कत्लखानों के बंद होने से यूपी के नानवेज खेमे में हलचल मच गई. योगी प्रशासन के इस कदम के बाद लखनऊ का मशहूर रेस्त्रां टुंडे कबाबी भी एक दिन के लिए बंद रहा. वहीँ नितीश कुमार ने बिहार में शराबबंदी की हुई है.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ यूपी में वेज बनाम नॉन वेज की इस अघोषित जंग में देश की शान नेताजी सुभाष चंद्र बोस के नारे “तुम मुझे खून दो मैं तुम्‍हे आजादी दूंगा” की तर्ज पर यूपी व बिहार के लोगों के बीच एक नया नारा आम हो रहा है कि, “तुम मुझे शराब दो, हम तुम्हें कबाब देंगे.”

इस खबर के सामने आते ही सोशल मीडिया में भी इस बात की जबरदस्‍त चर्चा की जानी शुरू हो गयी है कि नितीश नहीं चाहते कि बिहार के लोग शराब पियें और यूपी में अघोषित मांस बंदी हो गयी है इसलिए दोनों राज्यों के खाने-पीने वाले शौकीन लोग यूपी-बिहार बार्डर के इलाके में जाकर खा भी सकते हैं और पीने का लुफ्त भी ले सकते हैं. लोगों के जुगाड़ की इस खबर से बिहार सरकार के भी कई नेता सन्न हैं.


सोशल मीडिया में तेजी से ये बात फ़ैल गयी है कि यूपी और बिहार के लोग अब आपसी सहयोग से अपनी नॉनवेज खाने और पीने की जरुरत पूरी कर रहे हैं. योगी सरकार के अवैध कत्लखानों के खिलाफ मोर्चा खोलने के बाद खबर आयी कि लखनऊ का मशहूर रेस्त्रां टुंडे कबाबी भी एक दिन के लिए बंद रहा, हालांकि रेस्‍त्रा ने इसके लिए कोई कारण नहीं बताया.

अवैध कत्लखानों के बंद होने से दिक्कत क्यों ?

वहीँ बीजेपी के कई नेता कह रहे हैं कि अवैध कत्लखानों पर रोक लगायी गयी है और ऐसे में टुंडे कबाबी रेस्त्रां क्‍यों बंद हुआ इसका कारण समझना मुश्किल नहीं. वहीँ यूपी के कई लोग योगी की इस कार्यवाही का समर्थन कर रहे हैं. इसके अलावा कई अलग-अलग पार्टियों के नेताओं के मुताबिक़ ये गलत फैसला है और लोगों को मीट खाने की स्‍वतंत्रता होनी चाहिए.

हालांकि सोशल मीडिया में ऐसे नेताओं का जमकर मजाक उड़ाया जा रहा है. लोगों ने ट्वीट करके पूछा कि वैध मीट खाने की स्वतंत्रता तो है लेकिन नेता जी अवैध मीट खाने की स्‍वतंत्रता की वकालत क्यों कर रहे हैं? वहीँ एक अन्य व्यक्ति ने खुद को पंडित बताते हुए ट्वीट किया कि वो लखनऊ के रहने वाले हैं और वो जानते हैं कि टुंडे कबाबी रेस्त्रां वाले अवैध कत्लखानों से आधे दामों में मीट खरीदते थे और इसके लिए वो टैक्स भी नहीं देते थे, जबकि ग्राहकों से पूरा टैक्‍स वसूल कर सरकार को करोड़ों का चूना भी लगाते थे.

वहीँ खुद को एक पत्रकार बताते हुए मिश्रा जी ने ट्वीट किया कि यूपी में कबाब खाने पर कोई रोक नहीं लगी है, चाहे टुंडे बनाएं या पांडे. यदि अवैध कत्लखानों से मीट सस्ता मिल रहा था तो वैध मीट खरीदें और चाहें तो कबाब के रेट बढ़ा देन लेकिन अवैध मीट ना खरीदें वरना अंजाम भुगतने के लिए भी तैयार रहें.


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