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चीन के बाउंसर पर पीएम मोदी ने लगाया जोरदार सिक्सर, ट्रम्प बोले- अब आया खेल का मजा

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नई दिल्ली : भारत में तो पीएम मोदी कमाल कर ही रहे हैं, दूसरे देशों में उनकी विदेश नीति भी कमाल दिखा रही है. कांग्रेस के वक़्त कई पडोसी देश काफी आसानी से भारत को आँखें दिखा जाते थे, लेकिन अब पीएम मोदी की शानदार कूटनीति के चलते वही देश भारत के काबू में आ रहे हैं. अभी-अभी आयी बड़ी खबर को पीएम मोदी की चीन पर एक कूटनीतिक जीत माना जा रहा है.


चीन पर नकेल कसती मोदी की कूटनीति

हाल ही में ताइवान का संसदीय प्रतिनिधिमंडल भारत दौरे पर आया, जिसके बाद चीन की ओर से इस दौरे का कडा विरोध किया गया. चीन ने आँखें टेढ़ी करते हुए भारत से सवाल किये कि ताइवान ने क्यों भारत का आधिकारिक दौरा किया? जिस पर भारत की ओर से इस बात का खंडन करते हुए चीन को बताया गया कि ये कोई आधिकारिक नहीं बल्कि अनाधिकारिक दौरा है.

चीन का हाथ छोड़ ट्रम्प आये मोदी के साथ

दरअसल “वन चाइना” पालिसी के तहत चीन अपने पड़ोसी देश ताइवान को भी अपने देश का ही हिस्सा मानता है और ताइवान के साथ किसी भी देश के आधिकारिक संबंध उसके गले नहीं उतरते. आपको बता दें कि अभी कुछ ही वक़्त पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने चीन की “वन चाइना” पॉलिसी का समर्थन करते हुए इसे सही करार दिया था, लेकिन अब खबर आयी है कि पीएम मोदी के बीच में आने के कारण डोनाल्ड ट्रम्प ने इस मुद्दे पर भारत का समर्थन किया है.

रिपोर्ट्स के मुताबिक़ इस बात से चीन और भी ज्यादा तिलमिला गया है कि कि जो ट्रम्प पहले चीन के समर्थन में खड़े थे वो एकाएक भारत के पक्ष में कैसे हो गए? ट्रम्प के हस्तक्षेप के बाद ऊपर से तो चीन शांत हो गया है लेकिन कहा जा रहा है कि भारत ने उसकी दुखती रग पर हाथ रख दिया है. कई देश ताइवान की स्वतंत्रता की पैरवी करते आये हैं और यदि भारत उनका साथ देगा और अमेरिका जैसे शक्तिशाली देश का समर्थन उसे प्राप्त होगा तो चीन के लिए काफी मुश्किलें खड़ी हो जाएंगी.


काम कर रही है मोदी की चाणक्य नीति

जानकारों के मुताबिक़ जिस तरह पहले कश्मीर का राग अलापने वाले पाकिस्तान को पीएम मोदी ने बलूचिस्तान और सिंध मुद्दों पर उलझा दिया उसी तरह से पीएम मोदी अब चीन को उसी के मुद्दों में उलझा रहे हैं ताकि उसका सारा ध्यान भारत की ओर से हट के अपने मुद्दों पर केंद्रित हो जाए.

अब चीनी विदेश मंत्रालय ने भी बयान जारी करके कह दिया है कि भारत की ओर से ताइवान के साथ संबंधों को लेकर उन्हें पहले ही आश्वस्त किया जा चुका है. गौरतलब है कि ताइवान की ओर से दिल्ली में “ताइपेई इकॉनमिक ऐंड कल्चरल सेंटर” का संचालन किया जाता है और वहीँ दूसरी ओर ताइवान में भारतीय कार्यालय का नाम “इंडिया ताइपेई एसोसिएशन” रखा गया है.

कुल मिलाकर अब स्थिति ये है कि कश्मीर से ध्यान हटा के पाकिस्तान अपने बलूचिस्तान और सिंध को बचाने में व्यस्त हो गया है और अरुणाचल प्रदेश से ध्यान हटा के चीन ताइवान, जापान और मंगोलिया के मुद्दों में व्यस्त हो गया है. वहीँ दोनों पडोसी देशों की ओर से शान्ति मिलने पर भारत अपना सारा ध्यान विकास में लगा पा रहा है.


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