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श्रीलंका से आयी सबसे बड़ी खुशखबरी, दक्षिण में मोदी ने बचा लिया भारत को, चीन को दी पटखनी

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नई दिल्ली : प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी की शानदार कूटनीति के कमाल से भारत की दक्षिण में एक बड़ी जीत हुई है. आपने “स्टिंग ऑफ़ पर्ल्स” का नाम तो सुना ही होगा, नहीं सुना तो आपको बता दें कि ये चीन का भारत को चारों ओर से घेर कर सैन्य अड्डे बनाने का कांसेप्ट है.

चीन लंबे वक़्त से भारत को चारों तरफ से घेरने की योजना पर काम कर रहा है. भारत के चारों ओर जो देश मौजूद है वहां चीन अपने सैन्य अड्डे बनाने पर काम कर रहा है. इसी के चलते चीन ने म्यांमार की भी आर्थिक सहायता की, बांग्लादेश को भी हथियारों की मदद दी, नेपाल में भी चीन घुसपैठ में लगा है, पाकिस्तान में वो बंदरगाह और पाक-चीन कॉरिडोर बना ही रहा है, मालदीव और श्रीलंका पर भी चीन काम कर रहा है.

श्रीलंका में चीन की योजना ध्वस्त

मालदीव को तो भारत ने आर्थिक सहायता देकर अपनी ओर कर लिया, लेकिन श्रीलंका में चीन बड़ा निवेश कर रहा था. जिससे लगने लगा था कि चीन श्रीलंका के हम्बनटोटा बंदरगाह पर अपना सैन्य अड्डा बनाने में कामयाब हो जायेगा. अपना सैन्य ठिकाना बनाकर इस बंदरगाह पर चीन अपना युद्ध पोत तैनात करना चाहता था ताकि इसके जरिये भारत पर दबाव बना सके और भारत को घेर सके.

श्रीलंका को लुभाने के लिए चीन ने श्रीलंका को हम्बनटोटा बंदरगाह में 80 प्रतिशत हिस्सेदारी का प्रस्ताव दिया था. लेकिन पीएम मोदी के प्रयासों और सफल कूटनीति के चलते चीन अपनी इस योजना में सफल नहीं हो पाया. श्रीलंकाई राजदूत करूणासेना कोदितुवाक्कू ने साफ़ शब्दों में कहा है कि अन्य देशों के बारे में तो उन्हें नहीं पता, लेकिन श्रीलंका ऐसा कोई काम नहीं करेगा जिससे भारत को दिक्कत हो, उन्होंने कहा कि श्रीलंका ने साफ तौर पर चीनी निवेशक को सूचित कर दिया है कि उनके बंदरगाह को किसी सैन्य उद्देश्य के लिए उपयोग करने की इजाजत किसी को नहीं दी जाएगी.

करूणासेना ने बताया है कि भारत की चिंताओं को देखते हुए ऐसा फैसला लिया गया है. उन्होंने आगे कहाः कि हमारे बंदरगाह पर चीन को सैन्य अड्डा बनाने की छूट नहीं है, चीन केवल हमारे साथ व्यापार कर सकता है, सैन्य ठिकाना बनाने का तो कोई सवाल ही नहीं उठता.

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