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कांग्रेस से बोले सिद्धू… मोदी के खिलाफ नहीं बोलूंगा… ज्यादा दबाव डाला तो…

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नई दिल्ली : क्रिकेटर से नेता बने नवजोत सिंह सिद्धू पंजाब विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस में शामिल हो गए थे. कांग्रेस के टिकेट पर उन्होंने अमृतसर ईस्ट से चुनाव भी लड़ा. कांग्रेस को लगा था कि सिद्धू कांग्रेस के लिए प्रचार करेंगे और बीजेपी और पीएम मोदी पर करारा हमला बोलेंगे जिससे उन्हें चुनावी बढ़त मिलेगी लेकिन कांग्रेस की ये दिली इच्छा अधूरी ही रह गयी.

सिद्धू ने कांग्रेसियों को ठेंगा दिखाते हुए चुनाव प्रचार में एक बार भी पीएम मोदी के खिलाफ कुछ भी नहीं बोला. हालांकि अकालियों पर जरूर उन्होंने जम कर हमला बोला लेकिन बीजेपी के खिलाफ ज्यादा कुछ भी नहीं कहा. पंजाब विधानसभा चुनाव में सिद्धू का सारा गुसा सिर्फ अकालियों पर ही निकला और उनके लिए ये कोई नयी बात भी नहीं थी. क्योंकि सिद्धू पंजाब बीजेपी के कुछ नेताओं से तो तब भी नाराज रहा करते थे जब वो बीजेपी में हुआ करते थे.

बीजेपी से सिधु की नाराजगी तब भी सामने आयी थी जब 2014 में लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने अमृतसर से उनकी जगह अरुण जेटली को उम्मीदवार बना दिया था. उस वक़्त भी चुनाव प्रचार में सिधु ने जेटली के पक्ष में प्रचार करने से मना कर दिया था, जिसके बाद जेटली वो चुनाव हार भी गए थे. लेकिन हैरान की बात ये रही की बीजेपी से नाराज सिधु ने पीएम मोदी का मान रखते हुए उनके खिलाफ आजतक एक गलत शब्द तक नहीं बोला.

पीएम मोदी के नोटबंदी के फैसले के खिलाफ कांग्रेस से राहुल गांधी, तृणमूल कांग्रेस से ममता बनर्जी, बीएसपी से मायावती, समाजवादी पार्टी से अखिलेश यादव तक खड़े दिखाई दिए. पंजाब विधानसभा चुनाव में माना जा रहा था कि चुनाव प्रचार में सिद्धू अपने शायराना तरीके से पीएम मोदी की नोटबंदी के खिलाफ बोलेंगे और बीजेपी पर निशाना साधेंगे, लेकिन कांग्रेस का सपना हकीकत में तब्दील नहीं हो पाया.

पीएम मोदी को लेकर सिद्धू के मौन पर बीजेपी नेता मीनाक्षी लेखी ने सस्पेंस खड़ा करते हुए ये बयान देकर एक और तहलका मचा दिया कि सिद्धू को तो हमने ही लंका दहन के लिए भेजा है. सवाल उठने लगे कि यदि ये बात सही है तो सिधु के ‘राम” कौन हैं? पीएम मोदी पर सिद्धू के मौन को लेकर चर्चाओं का दौर चल पड़ा है, जानकारों का कहना है कि भले ही सिधु ने मोदी पर या बीजेपी पर कोई बड़ा हमला नहीं किया, लेकिन इसकी वजह ये नहीं कि वो कांग्रेस में बीजेपी के डबल एजेंट हैं, बल्कि इसके पीछे कारण ये है कि वो अब भी बीजेपी और पीएम मोदी का दिल से आदर करते हैं.

खैर वजह जो भी हो लेकिन ये बात तो तय है कि सिद्धू को कांग्रेस में शामिल करा कर कांग्रेस मोदी पर जो दांव खेलना चाहती थी, वो दांव बेकार हो गया और कांग्रेस को मुह की खानी पड़ी.

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