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बिहार से आयी ये खबर पढ़कर आपके पैरों तले जमीन खिसक जायेगी, मीडिया से भी भरोसा उठ जाएगा

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पटना : एक ओर जेएनयू में भारत विरोधी नारे लगाए जा रहे थे, वहीँ दूसरी ओर एनडीटीवी इंडिया का एक पत्रकार अपने चैनल में बैठ कर टीवी स्क्रीन को काला कर रहा था. अब उसी एनडीटीवी के पत्रकार के सगे बड़े भाई ब्रजेश कुमार पांडेय जोकि कांग्रेस का वरिष्ठ नेता भी है, का नाम सेक्स रैकेट चलाने में सामने आया है. उनके खिलाफ पॉस्को एक्ट के तहत केस भी दर्ज हो गया है जिसके बाद कल ब्रजेश पांडेय ने कांग्रेस पार्टी के उपाध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है.


रवीश कुमार के भाई करते थे लड़कियां सप्लाई?

सबसे ज्यादा हैरानी की बात तो ये है कि ब्रजेश पांडेय पर ये आरोप लगाने वाली कोई और नहीं बल्कि एक दलित कांग्रेसी नेता की नाबालिग बेटी है. कांग्रेस के ये दलित नेता पूर्व मंत्री भी रह चुके हैं. इस मामले में मुख्य संदिग्ध निखिल प्रियदर्शी नाम का एक बिजनेसमैन जोकि रिटायर्ड आईएएस अफसर कृष्ण बिहारी प्रसाद सिन्हा का बेटा है. उसके पिता रिटायर्ड आईएएस का नाम भी इस केस में है.

जांच के दौरान संजीत कुमार शर्मा और ब्रजेश कुमार पांडेय के नाम भी इस केस से जुड़े हुए पाए गए. पूर्व कांग्रेसी मंत्री की बेटी ने निखिल, संजीत और ब्रजेश पर सेक्स रैकेट चलाने का आरोप भी लगाया है. लड़की ने पुलिस के सामने कहा है कि ये तीनों बड़ी-बड़ी पार्टियों में हर उम्र की लड़कियां सप्लाई करने का काम करते हैं.

चुनाव लड़ने के लिए सांठगांठ

आपको बता दें कि ब्रजेश कुमार पांडेय कोई और नहीं बल्कि एनडीटीवी के नामी पत्रकार रवीश कुमार के सगे बड़े भाई हैं. ब्रजेश ने कांग्रेस के टिकट पर पिछला बिहार चुनाव भी लड़ा था लेकिन वो हार गए थे. इसके बाद ख़बरें ये भी आयीं थीं कि रवीश कुमार ने अपने बड़े भाई को कांग्रेस का टिकट दिलवाने के लिए पटना में एनडीटीवी के एक अन्य पत्रकार के जरिए काफी लॉबिंग की थी.

सबसे पहले जेडीयू से बात चलाई गयी, वहाँ दाल नहीं गलने पर कांग्रेस की ओर रुख किया. कांग्रेस पार्टी उन्हें अपने टिकट पर चुनाव लड़ाने के लिए तैयार भी हो गयी. हैरान कर देने वाली बात ये भी है कि केवल ब्रजेश ही नहीं बल्कि इस केस के बाकी दोनों आरोपी भी कांग्रेस पार्टी से ही जुड़े हुए हैं.


मीडिया को मैनेज करने में झोंकी ताकत

ख़बरों के मुताबिक़ पोल ना खुल जाए और बदनामी ना हो इसके डर से रवीश कुमार और मीडिया में मौजूद उनके मित्र पूरी कोशिश कर रहे हैं इस मामले को बड़े मीडिया चैनलों पर ना आने दिया जाए. सूत्रों के मुताबिक़ इस खबर को मीडिया में आने से रोकने के लिए उन्होंने बाकायदा सभी बड़े अखबारों और चैनलों के संपादकों से बात भी की है. शायद यही वजह है कि इस मामले में केस दर्ज होने के बावजूद किसी भी लोकल या नेशनल अखबार ने ये खबर नहीं छापी.

घटना के सामने आने के इतने दिन बाद अब जाकर दैनिक जागरण ने ये खबर छापी है वो भी केवल पटना एडिशन के सातवें पन्ने पर एक कोने में केवल 5 लाइनों की. हद तो ये है कि इस खबर में उसने ये तक नहीं बताया कि आरोपी ब्रजेश पांडेय आखिर हैं कौन और उनके और रविश कुमार के बीच क्या सम्बन्ध हैं? दैनिक जागरण के अतरिक्त टाइम्स ऑफ इंडिया अखबार ने भी असली सच्चाई को छिपाते हुए इस बारे में केवल एक छोटी सी खबर छाप दी है.

दलितों के हमदर्दों ने साधी चुप्पी

दलित उत्पीडन की किसी भी घटना के वक़्त तो एनडीटीवी पत्रकार रवीश कुमार पूरे मामले को ऐसे कवर करते हैं कि मानो वो दलितों के सबसे बड़े मसीहा हों. लेकिन उनके भाई के मामले में पीड़ित लड़की के दलित होने के बावजूद इस खबर को उन्होंने अपने चैनल में नहीं चलाया.

हर मामले की तरह इसे भी राजनीतिक साजिश कहकर टालना भी संभव नहीं है क्योंकि जिसने आरोप लगाया है वो खुद कांग्रेस नेता की ही बेटी है. बिहार में बीजेपी की सरकार भी नहीं है इसलिए पुलिस या प्रशासन पर उन्हें फंसाने का आरोप भी नहीं लगा सकते.


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2016 DD Bharti |