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एनआईए की इस रिपोर्ट को पढ़कर आपके पैरों तले जमीन खिसक जायेगी, देश बचा लिया मोदी ने

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नई दिल्ली : मां, माटी और मानुष” की बात करने वाली ममता के राज में बंगाल की हालात किस कदर खस्ता हो चुकी है, इस बात का कइयों को अंदाजा तक नहीं है. स्थिति इस कदर बद से बदतर हो चुकी है कि अब पूरे देश पर ही ख़तरा मंडराने लगा है. हाल ही में आयी एनआईए की ताजा रिपोर्ट के बारे में जानकार तो आपके पैरों तले जमीन ही खिसक जायेगी.

ममता की नाक के नीचे फल-फूल रहा था काला कारोबार

नकली नोट भारतीय अर्थव्यवस्था को कैसे खोखला करके रख देते हैं ये बात तो सब जानते ही हैं. हाल ही में आयी एनआईए की एक ताजा रिपोर्ट में बताया गया है कि देश में आने वाले 80 फीसदी नकली नोट ममता की नाक के नीचे से ही भारत में लाये गए थे. बंगाल के मालदा से लगी बांग्लादेश सीमा से धड्ड्ले से नकली नोट देश में आते रहे और ममता को इसकी खबर तक नहीं लगी.

बंगाल के मालदा जिले की तकरीबन 172 किलोमीटर लंबी सीमा बांग्लादेश से सटी है. सीमा पर कंटीले तारों की बाड़ तक नहीं है जिसके कारण कुछ जगहों पर सीमा पार करके भारत में दाखिल होना बेहद आसान है. लिहाजा तस्कर जाली नोट लेकर आसानी से भारत आ जाते थे और हैरानी की बात तो ये है कि इनमे से ज्यादातर तस्करों को ममता की पुलिस कभी पकड़ भी नहीं पाती थी. बंगाल से होते हुए ये जाली नोट पूरे देश में फ़ैल जाते थे और अर्थव्यवस्था को नुक्सान पहुचाते थे.


मुसीबत की जड़ पाकिस्तान में

सबसे ज्यादा हैरानी की बात तो ये है कि भारत में आने वाले जाली नोटों में से करीब 60 फीसदी नोट पाकिस्तान में छापे गए थे. पाकिस्तान से इन जाली नोटों को समुद्री रास्ते से बांग्लादेश ले जाया जाता था और बांग्लादेश से स्थानीय लोग इन नोटों की तस्करी करके इन्हें भारत में पहुचा देते थे.

जाली नोटों का कारोबार किस कदर इस इलाके में छाया हुआ था इसका अनुमान आप इसी बात से लगा सकते हैं कि पश्चिम बंगाल के मालदा जिला को “जाली नोटों की राजधानी” के नाम से जाना जाने लगा था. इलाके की पूरी अर्थव्यवस्था ही जाली नोटों के धंधे पर टिकी हुई थी. अब जरा पकडे गए जाली नोटों के आंकड़ों की ओर नज़र डालिये.

पीएम मोदी के एक फैसले ने ध्वस्त किया काला कारोबार

2013 में सुरक्षाबलों ने इस इलाके से 1.4 करोड़ के जाली नोट पकडे थे. 2014 में जाली नोटों की बरामदगी का ये आंकड़ा और बढ़ के 1.5 करोड़ तक पहुच गया. 2015 में सुरक्षा एजेंसियां हरकत में आयीं और सख्ती बरतने लगीं, लेकिन इसके बावजूद जाली नोटों की तस्करी में कोई कमी आने की जगह ये आंकड़ा दुगना होकर 3 करोड़ तक पहुंच गया. अक्तूबर, 2016 तक इस इलाके से 1.15 करोड़ के जाली नोट बरामद हो चुके थे, जिसके बाद नोटबंदी से पीएम मोदी ने अरबों रुपयों के इस काले कारोबार को ठप्प कर दिया.


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