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पीएम मोदी पर आयी इस रिपोर्ट को पढ़कर आपकी आँखें फटी रह जाएंगी, इसे कहते हैं “काम बोलता है”

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नई दिल्ली : जब से नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बने हैं, तबसे उनकी पूरी कोशिश रही है कि सीमा पार से प्रायोजित आतंकवाद पर नकेल कासी जाए और देश के कुछ राज्यों में फैले नक्सलवाद को ख़त्म कर दिया जाए. अब खबर आ रही है कि आतंकवाद और नक्सलवाद के खिलाफ जंग में मोदी सरकार को बड़ी जीत मिली है.


नक्सलवाद के खिलाफ मोदी की बड़ी जीत !

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ पिछले ढ़ाई-तीन सालों में देश में नक्सलवाद में 50 से 55 फ़ीसदी की कमी आई है. जहां पहले देश के करीब 135 जिले नक्सल प्रभावित थे, वहीँ अब ये संख्या घट के मात्र 35 रह गयी है, यानी केवल 35 जिले ऐसे बचे हैं जहाँ अभी भी नक्सलवाद का कुछ असर है, हालाकि इन जिलों में भी नक्सली घटनाओं में काफी कमी आई है.

शनिवार को गृहमंत्री राजनाथ सिंह ग्वालियर के टेकनपुर में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के पासिंग आउट परेड में शिरकत करने पहुंचे थे. वहां उन्होंने पत्रकारों को बताया कि केंद्र सरकार राज्यों की पूरी सहायता कर रही है और राज्य सरकारें भी अपनी जिम्मेदारियां सही तरीके से निभा रही हैं. उन्होंने बताया कि नक्सलवाद प्रभावित क्षेत्रों में अर्धसैनिक बलों की 100 से अधिक बटालियन तैनात हैं.

पीएम मोदी के लिए लामबंद हुई ब्रिटेन की संसद !

वहीँ ब्रिटेन की संसद ने भारत का पक्ष लेते हुए पाकिस्तान को बड़ा झटका दिया है. दरअसल बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा, पंजाब और सिंध पाकिस्तान के चार प्रांत हैं और अब पाक सरकार गिलगित-बाल्टिस्तान को अपना पांचवा प्रांत घोषित करने की तैयारी में है. जिसका वहां के लोग जबरदस्त विरोध

अभी हाल ही में बीजेपी के कुछ नेताओं के बयान भी आये थे जिसमे उन्होंने गिलगित-बाल्टिस्तान को भारत का हिस्सा बताया था. अब मोदी सरकार के पक्ष में ब्रिटिश सांसदों ने इस संबंध में एक प्रस्ताव भी पास कर दिया है. इस प्रस्ताव में गिलगित-बाल्टिस्तान को जम्मू-कश्मीर का वैध और संवैधानिक अंग बताया गया है, जिस पर पाकिस्तान ने 1947 में आजादी के बाद से गैरकानूनी तौर पर कब्जा किया हुआ है.


ना’पाक को खरी-खरी !

इस सिलसिले में ब्रिटेन की कंजर्वेटिव पार्टी के सांसद बॉब ब्लैकमैन ने 23 मार्च को संसद में एक प्रस्ताव पेश किया जिसमे कहा गया कि पाकिस्तान सरकार एक ऐसे भूभाग पर कब्जा करने की कोशिश में है, जो उसका हिस्सा है ही नहीं. इस प्रस्ताव में गिलगित-बाल्टिस्तान को कानूनी और संवैधानिक रूप से भारत के जम्मू-कश्मीर का हिस्सा बताया गया है.

साथ ही कहा गया है कि पाकिस्तान ने 1947 से ही इस भू-भाग पर गैरकानूनी तरीके से कब्जा किया हुआ है. इस इलाके के मूल निवासियों को मूलभूत सुविधाएं तक मुहैया नहीं हैं, यहां तक कि उन्हें तो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तक नहीं मिलती है.

इस प्रस्ताव में ये भी कहा गया है कि इस भू-भाग के जनसंख्या वितरण में कोई भी बदलाव करना इस विवादित इलाके में तनाव भड़काने जैसा होगा. आजादी के साथ हुए बंटवारे के वक्त से ही भारत गिलगित-बाल्टिस्तान को ऐतिहासिक और भूगोलीय आधारों पर अपना हिस्सा बताता आया है. उस दौरान विभाजन की शर्तें भी ब्रिटिश राज्य की सीमाओं के मुताबिक ही तय की गयी थीं, इसलिए ब्रिटेन की संसद में पारित ये प्रस्ताव भारत के लिए काफी फायदेमंद है.

पाकिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ता जा रहा है और अब जल्द ही इस भू-भाग को भारत में वापस जोड़ पाने की मोदी सरकार की मुहिम पूरी होने वाली है.


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