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पीएम मोदी ने दिखाई 56 इंच के सीने की ताकत, कर दिखाया सबसे बड़ा काम, थर-थर काँपा चीन

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नई दिल्ली : मनोहर पर्रिकर आजादी के बाद से भारत के अब तक के सबसे ताकतवर रक्षामंत्री हैं. ऐसा हम नहीं कह रहे हैं, बल्कि अभी-अभी आयी इस मीडिया रिपोर्ट को पढ़ने के बाद ऐसा आप खुद कहेंगे. चीन को एक हाथ से तमाचा मारने के बाद, दूसरे हाथ से पुचकारने के उनके तरीके की पूरी दुनिया में वाह-वाही हो रही है.

भारत-चीन सीमा पर ब्रह्मोस मिसाइल तैनात

चीन से सुरक्षा के लिए पहले तो उन्होंने अरुणाचल प्रदेश में ब्रह्मोस मिसाइलें तैनात करने का फैसला ले लिया, बाद में चीन के परेशान होने पर उन्होंने चीन को परेशान ना होने की हिदायत भी दे डाली. आपको बता दें की नेहरू के वक़्त भले ही चीन ने भारत पर हमला करके सियाचिन और तिब्बत पर कब्जा कर लिया हो लेकिन मोदी सरकार में चीन ऐसा करने के बारे में सोच तक नहीं सकता.

भारत पर हमला करने वाले पिटने के लिए तैयार रहें

गौरतलब है कि सुरक्षा की दृष्टि से केंद्र की मोदी सरकार ने भारत-चीन सीमा पर ब्रह्मोस मिसाइल की तैनाती का फैसला लिया है. चीन के आपत्ति जताने पर पर्रिकर ने मंगलवार को बयान दिया कि भारत के पाकिस्‍तान और चीन, दोनों देशों के साथ बेहतर रिश्‍ते हैं. वो किसी पर शक नहीं करना चाहते, लेकिन भारत पूरी तरह से तैयार हैं. यदि कोई भी देश भारत के सुरक्षा हितों के लिए खतरा पैदा करता है तो भारत की और से हरसंभव कार्रवाई की जायेगी.

अभी हाल ही में चीन ने अमेरिका, जापान और भारत को अपनी ताकत दिखाने के लिए इंटरकांटिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल का परिक्षण किया था. जिसके अगले ही दिन भारत की ओर से भी महाविध्वंसक युद्धपोत आईएनएस चेन्नई से ब्रह्मोस मिसाइल को दागा गया था ताकि चीन के ध्यान में रहे कि ये 1962 का भारत नहीं बल्कि 2017 का ताकतवर भारत है जो उसकी किसी गीदड़ भभकी से नहीं डरेगा.

ध्‍वनि से भी तीन गुना तेज गति से हमला करने में सक्षम

बीते वर्ष अगस्‍त में केंद्र की मोदी सरकार ने, सामरिक दृष्‍ट‍िकोण से बेहद अहम माने जाने वाले इस इलाके में ब्रह्मोस मिसाइल के एडवांस्‍ड वर्जन की तैनाती का फैसला लिया था. भारतीय सेना की और से एक नई रेजिमेंट को ब्रह्मोस मिसाइल के लेटेस्‍ट वैरियंट से लैस भी किया जा रहा है. इस नई रेजिमेंट में तकरीबन 100 मिसाइलें, बड़े-बड़े ट्रकों पर लोड पांच लॉन्‍चर और जरूरी हार्डवेयर व साॅफ्टवेयर होंगे. इस नई रेजिमेंट को तैयार करने पर तकरीबन 4,300 करोड़ रुपए खर्च होंगे.

हिमालय के इलाके में तैनात ब्‍लॉक-3 वर्जन में एडवांस्‍ड गाइडेंस सिस्‍टम है, जिससे मिसाइल ध्‍वनि से भी तीन गुना तेज गति से युद्धाभ्‍यास कर सकती है. इस एडवांस्‍ड गाइडेंस सिस्‍टम की मदद से मिसाइल किसी पहाड़ी के पीछे मौजूद निशानों पर भी सटीक हमले कर सकती है. इसके अलावा भारत ने अरुणाचल के इलाके में भारत-चीन सीमा पर सुरक्षा के लिहाज से काफी सारी नई सड़कों का निर्माण भी किया है. सिर्फ इतना ही नहीं बल्कि पूरे इलाके पर नियंत्रण रखने के लिए काफी ऊंचाई वाले इलाकों में एयरस्ट्रिप्‍स रनवे भी बनाये गए हैं.

आपको बता दें कि चीन ने भारत के अरुणाचल प्रदेश में ब्रह्मोस मिसाइलें तैनात करने के फैसले पर भारत को चेतावनी दी थी. चीनी सेना के मुखपत्र “द पीएलए डेली” में भारत को चेतावनी देते हुए लिखा गया था कि चीन भी सीमा पर ऐसी कार्रवाई कर सकता है. चीन के मुताबिक़ भारत के इस फैसले से भारत-चीन रिश्‍तों पर नकारात्‍मक प्रभाव तो पड़ेगा ही और साथ में क्षेत्रीय संतुलन पर भी असर पड़ेगा.

लेकिन पर्रिकर ने चीन की गीदड़ भभकी पर ध्यान ना देते हुए कहा था कि भारत अपनी राष्‍ट्रीय सुरक्षा को ध्‍यान में रखकर ही फैसले लेगा.

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