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बंगाल पर आयी ये रिपोर्ट पढ़कर आपकी आँखें फटी रह जाएंगी, भगवान् ही मालिक अब बंगाल का

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नई दिल्ली : पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के राज में पहले तो बंगाल से सिर्फ हिंदुओं के खिलाफ साम्प्रदायिक हिंसा की ही ख़बरें आती थी, लेकिन अब जो खबर सामने आयी है वो तो और भी ज्यादा हैरान-परेशान करने वाली है. कहा जाता है कि नार्थ कोरिया में बच्चों को कम उम्र से ही स्कूलों में पढ़ाया जाता है कि वहां का तानाशाह और उसका परिवार कितना महान है और उसकी गुलामी करना कितनी अच्छी बात है, इससे जब तक बच्चे बड़े होते हैं तब तक मानसिक गुलाम बन चुके होते हैं और कभी तानाशाह के खिलाफ विद्रोह नहीं करते. अब ममता सरकार भी इसी की तर्ज पर बंगाल में बच्चों की ब्रेनवाशिंग करने को तैयार दिख रही है. इस पोस्ट को पूरा पढ़ने पर आपको ममता और नरेन्द्र मोदी की काबिलियत के बीच क्या अंतर है ये भी पता चलेगा.


बंगाल में बच्चे पढ़ेंगे ममता बनर्जी पर चैप्टर

अभी-अभी आयी खबर के मुताबिक़ पश्चिम बंगाल में अब बच्चे स्कूलों में ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस के नेताओं पर चैप्टर पढ़ेंगे. यानी बचपन से ही उनके दिमाग में डाला जाएगा कि ममता बनर्जी और उनकी पार्टी कितनी महान है. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक़ पश्चिम बंगाल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन ने नई पाठ्यपुस्तकों में सिंगुर जमीन आंदोलन पर अध्याय जोड़ा है. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इसी आंदोलन के कारण ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस की पश्चिम बंगाल में सरकार बनाने की मुहिम को गति मिली थी.

जिस पाठ्यपुस्तक में ये अध्याय जोड़ा गया है उसका नाम ‘अतीत ओ एत्झयो‘ है जिसे कक्षा आठ के लिए प्रकाशित किया जा रहा है. अगले शैक्षणिक सत्र से स्कूली बच्चे को इसे पढ़ाया जाएगा. सिंगुर आंदोलन के अध्याय की शुरुआत ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खुद के संदर्भ से होती है. उसके बाद इसमें तृणमूल कांग्रेस के कई अन्य नेताओं जैसे पार्थ चटर्जी, मुकुल रॉय, पुर्णेंदु बासु, अशिमा पात्रा, डोला सेन, बृत्या बासु, अर्पिता घोष, सोवन चटर्जी, फिरहद हकीम, सोवनदेब चटर्जी, सुब्रता बक्शी, रबिंद्रनाथ भट्टाचार्जी, बेचाराम मन्ना आदि के भी नाम आते हैं.


इस अध्याय द्वारा बच्चों को सिखाया जाएगा कि सिंगुर आंदोलन एक ऐसा ‘ऐतिहासिक आंदोलन’ था जिसके जरिये से बंगाल की महान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने जमीन अधिगृहण विरोधी आंदोलन को संगठित किया और किसानों के संघर्ष को दिशा दी. अध्याय में बताया गया है कि आंदोलन ने बंगाल में लखटकिया कार प्रोजेक्ट “नैनो” की फैक्ट्री लगाने की खराब कोशिश को रोक दिया जिसके पीछे विकास के लिए औद्योगिकरण और रोजगार सृजन का नाम लिया जा रहा था.

 


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