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केजरीवाल सरकार के बेहद सनसनीखेज कांड के खुलासे से मचा सियासी हड़कंप, दंग रह गया पूरा देश !

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नई दिल्ली : दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल अभी पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों में करारी शिकस्त के सदमे से उबरे भी नहीं थे कि उनके ऊपर एक बार फिर मानो आसमान ही फट पड़ा है. इस बार तो केजरीवाल इतनी बड़ी मुसीबत में फस गए हैं कि देशभर में आम आदमी पार्टी के नाम पर थू-थू हो रही है.


जनता के टैक्स के पैसे का दुरुपयोग !

दरअसल खबर आयी है कि बुधवार को एलजी अनिल बैजल ने चीफ सेक्रेटरी को आदेश दे दिए है कि आम आदमी पार्टी से 97 करोड़ रुपए वसूल किये जाएँ. आरोप है कि दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन्स का उलंघन करके मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल और आम आदमी पार्टी की इमेज चमकाने के लिए जनता के टैक्स के पैसे का दुरुपयोग किया है.

केजरीवाल सरकार पर आरोप हैं कि दिल्ली के सीएम केजरीवाल और आम आदमी पार्टी की इमेज चमकाने के लिए उन्होंने 97 करोड़ रुपये के विज्ञापन चलवाये. पिछले साल 31 दिसंबर को अनिल बैजल ने एलजी का पद सम्भाला था, इससे पहले एलजी नजीब जंग के साथ भी केजरीवाल का छत्तीस का आंकड़ा था और वो पूर्व एलजी पर पीएम मोदी के इशारों पर काम करके उन्हें परेशान करने का आरोप लगाते थे.


30 दिन में की जाए वसूली !

एलजी अनिल बैजल ने चीफ सेक्रेटरी एमएम कुट्टी को आदेश दिए हैं कि केजरीवाल सरकार के ऐड देने के खर्च की जांच की जाए और जिम्मेदारियां भी तय की जाएं. एलजी ने आदेश दिए कि केजरीवाल सरकार विज्ञापन चलाने के लिए जनता के टैक्स के पैसों से अब तक 42 करोड़ का भुगतान कर चुकी है, 30 दिनों के अंदर-अंदर आम आदमी पार्टी से वो सारा पैसा वसूल किया जाए और बकाया राशि 55 करोड़ का भुगतान आम आदमी पार्टी खुद अपनी जेब से करे.

कैग की रिपोर्ट में भी हुआ था खुलासा !

इससे पहले 10 मार्च को दिल्ली असेंबली में पेश की गयी कैग की रिपोर्ट में भी खुलासा हुआ था कि केजरीवाल सरकार ने 29 करोड़ के विज्ञापन दिल्ली के बाहर दिए, जो उसकी सीमा में नहीं थे. सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन्स का उलंघन करके 24 करोड़ के विज्ञापन दिए गए. पिछले साल कांग्रेस नेता अजय माकन ने भी आम आदमी पार्टी सरकार की शिकायत विज्ञापन कमेटी से की थी. यह कमेटी सरकारों के विज्ञापनों पर हुए खर्च की निगरानी के लिए बनाई गई है.

अपनी शिकायत में माकन ने कहा था कि केजरीवाल सरकार जनता के टैक्स के पैसे को अपनी पार्टी की छवि चमकाने के लिए विज्ञापन चलाने में बर्बाद कर रही है. उस वक़्त कमेटी की ओर से स्पष्ट तौर पर कहा गया था कि 13 मई, 2015 को सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन्स जारी होने के बाद के विज्ञापनों का पूरा भुगतान आम आदमी पार्टी को खुद करना होगा.


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