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दुनिया नें माना भारत का लोहा, अमेरिका, रूस और चीन को पीछे छोड़ भारत ने बना दिया विश्व रिकॉर्ड

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नई दिल्ली : अभी-अभी आयी एक बड़ी खबर से पाकिस्तान, चीन सन्न रह गए हैं. जहां चीन अपनी विस्तारवादी नीतियों में खो सा गया है और पाकिस्तान तो बस आतंकियों को भारत में घुसाने की फिराक में ही लगा रहता है वहीँ भारतीय वैज्ञानिकों ने अभी थोड़ी देर पहले इतिहास रच डाला है.

इसरो ने बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड

अभी-अभी आयी बड़ी खबर के मुताबिक़ इसरो यानी भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के वैज्ञानिकों ने चेन्नई से तकरीबन 125 किलोमीटर दूर स्थित “श्री हरिकोटा” उपग्रह प्रक्षेपण केंद्र से एक ही रॉकेट से 104 उपग्रहों को प्रक्षेपित करके इतिहास रच दिया है. आपको बता दें कि भारत के लिए ये बहुत ही गौरव का समाचार है क्योंकि ऐसा पहली बार हुआ है जब कोई देश एक ही रॉकेट से 104 उपग्रहों को अंतरिक्ष में भेजने में सफल हुआ है.

सुबह तकरीबन 5 बजकर 28 मिनट पर पीएसएलवी-सी37/कार्टोसेट-2 श्रृंखला के सेटेलाइट मिशन के प्रक्षेपण के लिए श्री हरिकोटा में उलटी गिनती शुरू हुई, जिसके बाद 9 बजकर 28 मिनट पर इसे लांच किया गया. सबसे ज्यादा ख़ुशी की बात तो ये भी है कि इसरो द्वारा प्रक्षेपित किए गए 104 उपग्रहों में से केवल तीन उपग्रह ही भारत के हैं, अन्य देशों के उपग्रहों को प्रक्षेपित करने से इसरो को काफी मोटी रकम भी मिलेगी.

दिन दूनी रात चौगुनी बढ़ रही है इसरो की कमाई

हालांकि अभी तक इसरो की ओर से इस बात का आधिकारिक खुलासा नहीं किया गया है कि सैटेलाइट के लांच से उन्हें कितने करोड़ मिलने वाले हैं. विदेशी उपग्रहों को सफलतापूर्वक अतरिक्ष में स्थापित करने के लिए इसरो पोलर सेटेलाइट लॉन्च व्हीकल (पीएसएलवी) का इस्तेमाल करता है जिससे खर्च बेहद कम आता है, यही वजह है कि उपग्रह लांच के लिए इसरो 20 देशों की पहली पसंद बन चुका है.


आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कभी साइकिल पर सैटेलाइट ले जाने वाले इसरो ने पिछले 5 वर्षों में कुल 896 करोड़ रुपये कमाए हैं. 2010-11 में इसरो का मुनाफा 138 करोड़ रुपये था जो मोदी सरकार के आने के बाद 2014-15 में बढ़कर 205 करोड़ रुपये हो गया. 2013 से लेकर 2015 तक इसरो ने 13 देशों के 28 विदेशी उपग्रहों को अंतरिक्ष में स्थापित करके 10.01 करोड़ डॉलर कमाए.

सारी दुनिया में गूँज रहा है भारत के वैज्ञानिकों का काम

पिछले साल 22 जून को इसरो ने पीएसएलवी-सी34 के इस्तमाल से 17 विदेशी और तीन स्वदेशी उपग्रह अंतरिक्ष में भेजे. इसके अलावा पिछले साल अगस्त में भी इसरो को 68 अन्य विदेशी उपग्रहों को लांच कराने का ठेका मिला था. पिछले एक दशक में इसरो द्वारा लांच किये गए सैटेलाइट में से 38 फीसदी सैटेलाइट स्वदेशी थे तथा अन्य सभी सैटेलाइट विदेशी थे जिसके लिए इसरो ने बतौर किराया काफी रकम कमाई.

इसरो की कमर्शियल इकाई “एंट्रिक्स कॉरपोरेशन” को अब तक 500 करोड़ रुपये के ऑर्डर मिल चुके हैं और करीब इतनी ही कीमत के अन्य आर्डर भी जल ही मिलने वाले हैं. ग्लोबल सैटेलाइट मार्केट में भारत की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ती जा रही है. दुनिया की अन्य सभी सैटेलाइट लॉन्चिंग एजेंसियों के मुकाबले में इसरो की लॉन्चिंग 10 गुना सस्ती है यानी 10 गुना कम दाम पर अन्य देश भारत से अपने उपग्रह लांच करवा रहे हैं. भारत के लिए ये वक़्त स्वर्णिम वक़्त बन चुका है.


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